आपकी कमजोर भाग्य रेखा करवाती है उम्र से ज्यादा बड़े व्यक्ति से आपकी शादी

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आपकी कमजोर भाग्य रेखा करवाती है उम्र से ज्यादा बड़े व्यक्ति से आपकी शादी

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जब शुक्र पर्वत जो अंगूठे के नीचे होता है तथा गुरु पर्वत जो तर्जनी अंगुली के नीचे होता है, ये दोनों पर्वत जब पूर्ण विकसित और दोष रहित हो तो विवाह के पूर्ण योग बनते हैं।

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विवाह एक ऐसा बंधन है जो केवल दो शरीरों को ही नहीं बल्कि दो आत्माओं, दो परिवारों और दो अलग संस्कार-संस्कृति के इंसानों को एक सूत्र में जीवनभर के लिए बांध देता है। इसीलिए प्रत्येक धर्म-समाज में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण संस्कार के रूप में देखा जाता है। हिंदू परिवारों में तो विवाह से पूर्व भावी वर-वधू की कुंडली मिलाने की प्रबल परंपरा भी है। हस्तरेखा शास्त्र में भी विवाह से जुड़े ऐसे अनेक योग बताए गए हैं जिन्हें देखकर पता लगाया जा सकता है किजातक का विवाह किन परिस्थितियों में और कैसा होगा।

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जब शुक्र पर्वत जो अंगूठे के नीचे होता है तथा गुरु पर्वत जो तर्जनी अंगुली के नीचे होता है, ये दोनों पर्वत जब पूर्ण विकसित और दोष रहित हो तो विवाह के पूर्ण योग बनते हैं। इनके अलावा कई योग होते हैं,

आइए जानते हैं उनके बारे में-
यदि हथेली में भाग्य रेखा का उद्गम स्थान चंद्र पर्वत से हो तो विवाह पूर्ण सुखी होता है।
यदि भाग्य रेखा हृदय रेखा पर समाप्त हो जाए तो भी विवाह सुखद होता है।
यदि गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह हो तो ऐसा जातक अपने विवाह से पूर्ण संतुष्ट रहता है।
यदि शुक्र पर्वत कम उभरा हुआ हो तो विवाह में सुख की कमी रहती है।
यदि शुक्र पर्वत पर लाल रंग का तारा जैसा चिन्ह बना हुआ हो तो विवाह में कष्ट बना रहता है।
यदि विवाह रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो तो जातक विवाह से संतुष्ट नहीं रहता।
यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस का चिन्ह हो तो विवाह में बहुत परेशानी आती है।
यदि सूर्य रेखा तथा विवाह रेखा आपस में एक दूसरे को काटती हो तो बेमेल विवाह होता है।
शुक्र पर्वत अत्यधिक विकसित हो तो ऐसे जातक की जोड़ी ठीक नहीं बनती।
मणिबंध से शुक्र पर्वत तक कोई रेखा जाए तो बिजनेसमैन से विवाह होता है।
मणिबंध से कोई रेखा बुध पर्वत तक पहुंचे तो जातक का विवाह बड़े व्यापारी से होता है।
यदि सूर्य रेखा का संबंध शुक्र रेखा से हो तो विदेशी व्यापारी से विवाह का संयोग बनता है।
यदि कोई रेखा मणिबंध से निकलकर शुक्र पर्वत तथा शनि पर्वत पर जाती हो तो बूढ़े व्यक्ति से विवाह होता है।
यदि हाथ कमजोर एवं संकीर्ण हो तथा भाग्य रेखा एवं प्रणय रेखा दूषित हो तो अपनी उम्र से बहुत बड़े व्यक्ति से विवाह होता है।

विवाह में बाधा और तलाक भी बताती हैं रेखाएं
विवाह रेखा कई जगह से कटी हुई हो।
चंद्र पर्वत पर आड़ी-तिरछी बहुत सी रेखाएं हों।
शुक्र पर्वत पर दो तारा चिन्ह हो तो विवाह में बाधा आती है।
शुक्र रेखा से हृदय रेखा तक कोई रेखा जाए तो तलाक होता है।
भाग्य रेखा पर द्वीप हो या विवाह रेखा के अंत में रेखाओं का गुच्छा हो तो तलाक होने की संभावना रहती है।

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